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Malchand Kuldeep S/O Jodharam Kuldeep vs. State Of Rajasthan

Court:High Court of Rajasthan (Jaipur Bench)
Judge:Hon'ble Unknown Judge
Case Status:Unknown Status
Order Date:1 Mar 2021
CNR:RJHC020568832020

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Order Issued After Hearing

Purpose:

First Hearing

Listed On:

22 Sept 2020

Order Text

HIGH COURT OF JUDICATURE FOR RAJASTHAN BENCH AT JAIPUR

S.B. Criminal Writ Petition No. 664/2020

Malchand Kuldeep S/o Jodharam Kuldeep

----Petitioner

Versus

State Of Rajasthan

----Respondent

Connected With

S.B. Criminal Miscellaneous (Petition) No. 5708/2020 Devendra Kumar Jajoria S/o Shri Kailash Chand Jajoria

----Petitioner

----Respondent

Versus

State Of Rajasthan

For Petitioner(s) : Ms. Vidhi Jain & Ms. Savita Nathawat For Respondent(s) : Mr. F.R. Meena, PP Mr. Suresh Sahni with Mr. R.M. Sharma

HON'BLE MR. JUSTICE SATISH KUMAR SHARMA

Order

01/03/2021

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समय बाद तक पुलिस द्वारा कोई कार्यवाही नहीं की गयी एवं कई प्रतिवेदन देने के पश्चात अनुसंधान प्रारम्भ किया गया, लेकिन ठोस साक्ष्य होने के बावजूद अभियुक्त को आज तक गिरफ्तार नहीं किया गया है। अब इस मामले का अनुसंधान दूसरे सहायक पुलिस आयुक्त, महिला शाखा, आयुक्तालय जयपुर को अन्तरित कर दिया गया है। अभियुक्त ने परिवादी पक्ष के गवाहों की तफ्तीश कराने के लिए अभ्यावेदन दायर किया है, जिस पर अनुसंधान अधिकारी अनुसंधान करने को उतारू हैं, जबकि अभियुक्त को अनुसंधान में हस्तक्षेप करने का कोई अधिकार नहीं है। यह मामला सीधे–सीधे अभियुक्त देवेन्द्र जाजोरिया द्वारा अपनी पत्नी अर्थात परिवादी की पुत्री की हत्या का है, लेकिन पुलिस मामले को रफा–दफा कर रही है, अतः स्वच्छ और निष्पक्ष अनुसंधान कराने के लिए प्रकरण का अनुसंधान सीबीआई को अन्तरित किया जाना आवश्यक है। उन्होंने अपने समर्थन में निम्न न्यायिक दृष्टान्त पेश किये–

  1. State of Himachal Pradesh Vs. Jeet Singh AIR1999SC1293
  • Central Bureau Of Investigation & Ors. AIR1997 SC93
  • State of West Bengal and Ors. Vs. The committee for Protection of Democratic Rights, West Bengal and Ors. AIR2010SC1476

प्रत्यर्थी—अभियुक्त के विद्वान अधिवक्ता का कहना है कि इस मामले में शादी के नौ साल बाद मृतका ने आत्महत्या की है। प्रत्यर्थी—अभियुक्त सर्वथा निर्दोष है, उस पर पुलिस से मिलीभगत का आरोप सर्वथा निराधार है। यदि उसकी पुलिस ने मिलीभगत होती तो उसके खिलाफ बिना व्यापक तफ्तीश के धारा 306 भा.दं.सं. का अपराध बनना पाये जाने का निष्कर्ष नहीं निकाला जाता। स्वयं परिवादी पक्ष अनुसंधान में सहयोग नहीं कर रहा है। निष्पक्ष अनुसंधान सुनिश्चित करने के लिए यदि अभियुक्त की ओर से सुसंगत तथ्य अनुसंधान अधिकारी के समक्ष अभ्यावेदन के जरिये प्रस्तुत किये जाते हैं तो इसमें कोई कानूनी अवरोध नहीं है। याची—परिवादी की याचिका खारिज होने योग्य है।

उपरोक्त न्यायिक दृष्टान्तों में प्रतिपादित विधिक स्थिति के संदर्भ में विवाद की कोई गुंजाईश नहीं है लेकिन प्रश्नगत प्रथम सूचना रिपोर्ट में अनुसंधान जारी है। अतः गुणावगुण पर कोई मत व्यक्त किया जाना उचित व वांछनीय नहीं है। दोनों याचिकाओं में दोनों पक्षों की दलीलों के संदर्भ में इस स्टेज पर इतना ही उल्लेख किया जाना पर्याप्त है कि इस प्रकरण में अनुसंधान के पश्चात प्रथम अनुसंधान अधिकारी ने अभियुक्त के खिलाफ धारा 306 भा.दं.सं. का अपराध

[CRLW-664/2020]

प्रथमदृष्टया प्रमाणित माना है। इसके बाद प्रकरण का अनुसंधान उच्च अधिकारी को अन्तरित हुआ है। इन परिस्थितियों में प्रथमदृष्टया यह माने जाने योग्य नहीं है कि अनुसंधान अधिकारी अभियुक्त पक्ष के दबाव में है अथवा उनसे मिले हुए हैं, अतः इस प्रकरण का अनुसंधान सीबीआई को अन्तरित किये जाने की याची–परिवादी की प्रार्थना अस्वीकार की जाती है साथ ही अनुसंधान अधिकारी को निर्देशित किया जाता है कि वे प्रकरण का निष्पक्ष, प्रभावी एवं विधि–अनुकूल अनुसंधान यथासंभव तीन माह में पूर्ण करें। तदुपरान्त लोक अभियोजक द्वारा मामले की नवीनतम स्टेट्स रिपोर्ट पेश की जावे।

प्रकरण दिनांक 27.04.2021 को पुनः सूचीबद्ध किये जावें।

(SATISH KUMAR SHARMA),J

Mittal /111-112

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