Vijay Singh @ Sonu Singh S/O Shri Rajendar Singh vs. The State Of Rajasthan
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Order Issued After Hearing
Purpose:
Case Registered
Listed On:
18 May 2020
Order Text
राजस्थान उच्च न्यायालय, जयपुर पीठ, जयपुर
एकलपीठ दाण्डिक विविध<u> जमानत प्रार्थना पत्र संख्या –5096 / 2020</u>
विजय सिंह उर्फ सोनू सिंह पुत्र श्री राजेन्द्र सिंह, निवासी गांव भैंसलाना, पुलिस थाना सरूण्ड तहसील कोटपूतली, जिला जयपूर । ——प्रार्थी / अभियुक्त
$-$ : बनाम :-
राजस्थान राज्य जरिए लोक अभियोजक -अप्रार्थी
आदेश दिनांक:—
27.05.2020
माननीय न्यायाधिपति श्री प्रकाश गुप्ता
उपस्थित:–
श्री देशराज सैन, अधिवक्ता वास्ते प्रार्थी / अभियुक्त (जरिये वी.सी.) श्री मंगलसिंह सैनी , विद्वान लोक अभियोजक । न्यायालय द्वारा :-
योग्य अधिवक्ता प्रार्थी / अभियुक्त को निर्देशित किया जाता है कि लॉक डाउन आदेश प्रत्याहत होने व न्यायालय के सूचारू रूप से कार्यरत होने पर वे पत्रावली में कार्यालय द्वारा इंगित आक्षेपों की पूर्ति करें।
प्रार्थी / अभियुक्त विजय सिंह उर्फ सोनू सिंह द्वारा यह जमानत आवेदन पत्र अन्तर्गत धारा 439 दण्ड प्रक्रिया संहिता उसे पुलिस थाना बानसूर जिला अलवर में दर्ज प्रथम सूचना रिपोर्ट संख्या 177/2020, अपराध अन्तर्गत धारा 457 व 380 भारतीय दण्ड संहिता में नियमित जमानत प्रदान किये जाने के संबंध में प्रस्तुत किया गया है।
बहस सुनी गई ।
योग्य अधिवक्ता प्रार्थी का तर्क है कि प्रार्थी को प्रकरण में झूंठा फंसाया गया है, प्रार्थी लम्बे समय से न्यायिक अभिरक्षा में हैं, आरोपित अपराध मजिस्ट्रेट न्यायालय द्वारा अन्वीक्षा योग्य हैं, मामले की अन्वीक्षा में समय लगेगा। उनका यह भी तर्क है कि प्रार्थी के विरूद्ध लंबित अन्य पांच आपराधिक प्रकरणों में से एक प्रकरण में राजीनामा हो चुका है, प्रार्थी की अनुसंधान हेतु कोई आवश्यकता नहीं है, अतः प्रार्थी को जमानत पर छोड़ा जावे।
विद्वान लोक अभियोजक ने जमानत प्रार्थना पत्र का विरोध किया । दोनों पक्षों के अधिवक्तागण द्वारा रखे गए तर्को व प्रकरण के समस्त तथ्यों व परिस्थितियों को दृष्टिगत रखते हुए प्रकरण के गुणावगुण पर कोई अंतिम राय व्यक्त किए बिना प्रार्थी को जमानत की सुविधा दिया जाना न्यायोचित प्रतीत होता है।
परिणामतः यह जमानत आवेदन पत्र स्वीकार किया जाता है तथा आदेश दिया जाता है कि यदि प्रार्थी / अभियुक्त विचारण न्यायालय के संतोषप्रद 50,000 / –रूपए (अक्षरे रूपये पचास हजार मात्र) का व्यक्तिगत बंधपत्र इस आशय का प्रस्तुत कर दे कि वह प्रकरण के विचारण के दौरान विचारण न्यायालय के समक्ष प्रत्येक तारीख पेशी पर उपस्थित होता रहेगा तो प्रार्थी / अभियुक्त को (यदि वह अन्य किसी प्रकरण में वांछित न हो तो) अविलम्ब जमानत पर रिहा कर दिया जावे । साथ ही यह भी आदेश दिया जाता है कि प्रार्थी / अभियुक्त 25,000–25,000 / – रूपये की दो सुदृढ़ एवं विश्वसनीय प्रतिभूतियां लॉक डाउन आदेश प्रत्याहृत होने के बाद दो सप्ताह की अवधि में विचारण न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करेगा ।
प्रार्थी / अभियुक्त द्वारा उपरोक्तानुसार दो प्रतिभूतियां निश्चित् समयावधि में प्रस्तुत नहीं किए जाने की स्थिति में अधीनस्थ न्यायालय विधिनुसार कार्यवाही करने हेतु स्वतंत्र होगी ।
(न्या0 प्रकाश गुप्ता)
ऋषिकेश सोनी / 32
$\overline{2}$
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