Surendra @ Sunil S/O Shri Ramniwas vs. State Of Rajasthan
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Order Issued After Hearing
Purpose:
Disposed
Before:
Hon'ble Vinod Kumar Bharwani
Listed On:
1 Jun 2023
Order Text
HIGH COURT OF JUDICATURE FOR RAJASTHAN BENCH AT JAIPUR
JASTHAN HIGH COL
S.B. Criminal Miscellaneous Bail Application No. 4076/2023
Surendra @ Sunil S/o Shri Ramniwas, Aged About 28 Years, R/o Dani - Jeevan Siwali Tan - Kharkada, Police Station Bansur, District Alwar, Rajasthan. (Accused Petitioner Presently Confined In Sab Jail Kotputli).
----Petitioner
Versus
State Of Rajasthan, Through Pp
----Respondent
| For Petitioner(s) | : | श्री धीरज त्रिपाठी |
|---|---|---|
| For Respondent(s) | : | श्री मंगल सिंह सैनी, लोक अभियोजक |
| श्री नरपत सिंह शेखावत |
HON'BLE MR. JUSTICE VINOD KUMAR BHARWANI
<u>Order</u>
01-06-2023
प्रार्थी/अभियुक्त की ओर से अधीनस्थ न्यायालय द्वारा पारित आक्षेपित आदेश दिनांक– 04.04.2023 के विरूद्ध यह जमानत आवेदन पत्र अन्तर्गत धारा 439 दण्ड प्रक्रिया संहिता उसे पुलिस थाना प्रागपुरा, जिला जयपुर में दर्ज प्रथम सूचना रिपोर्ट संख्या 122/2023 अपराध अन्तर्गत धारा 376, 506 भारतीय दण्ड संहिता में नियमित जमानत प्रदान किये जाने के संबंध में प्रस्तुत किया गया है।
बहस सुनी गई ।
योग्य अधिवक्ता प्रार्थी का तर्क है कि प्रार्थी को मामले में झूंठा फंसाया गया है, प्रार्थी द्वारा पीड़िता के साथ कोई जबरदस्ती नहीं की गई है, मामला सहमति का है ,प्रथम सूचना रिपोर्ट, पीड़िता के कथन अन्तर्गत धारा 161 व 164 दण्ड प्रक्रिया संहिता में विरोधाभास है, अभियुक्त से मोबाईल जप्त किया गया है उसमें पीड़िता की कोई फोटो या वीडियो नहीं मिला, प्रार्थी दिनांक– 27.03.2023 से अभिरक्षा में है, अन्वीक्षा में समय लगेगा, अतः प्रार्थी को जमानत पर छोड़ा जावे ।
The (2 of 2) COL
विद्वान लोक अभियोजक व योग्य अधिवक्ता परिवादी ने जमानत प्रार्थना पत्र का विरोध करते हुए तर्क प्रस्तुत किया कि प्रार्थी / अभियुक्त द्वारा पीड़िता के ससुराल में जाकर उसके साथ जबरदस्ती दुष्कर्म किया गया है, शादी होने के बाद लगातार उसे परेशान किया जाता रहा है, प्रार्थी / अभियुक्त, पीड़िता के पिता की मौसी का लड़का है, इस संबंध को भी उसने शर्मसार किया है , अतः जमानत प्रार्थना पत्र निरस्त किया जावे।
हमने दोनों पक्षों द्वारा प्रस्तुत तर्को व वितर्कों पर मनन किया। प्रार्थी द्वारा पीड़िता के ससुराल में जाकर उसके साथ दुष्कर्म किये जाने का आरोप है, अतः अनुसंधान के दौरान आयी साक्ष्य, पीड़िता के कथनों, प्रकरण की तथ्यात्मक स्थिति तथा अन्य परिस्थितियों पर विचार करने के बाद, प्रकरण के गुणावगुण पर कोई अंतिम राय व्यक्त किए बिना प्रार्थी को जमानत की सुविधा दिया जाना न्यायोचित प्रतीत नहीं होता है।
परिणामतः प्रार्थी/अभियुक्त सुरेन्द्र उर्फ सुनील पुत्र श्री रामनिवास की ओर से प्रस्तुत यह जमानत आवेदन पत्र स्वीकार योग्य नहीं होने से निरस्त किया जाता है ।
विचारण न्यायालय में पीड़िता के बयान लेखबद्ध होने के पश्चात् प्रार्थी पुनः जमानत आवेदन पत्र प्रस्तुत करने हेतु स्वतंत्र होगा ।
(VINOD KUMAR BHARWANI),J
Rishikesh Soni/13
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