Darshan Bai vs. Amar Singh Meena
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Order Issued After Hearing
Purpose:
Case Registered
Listed On:
4 Jun 2018
Order Text
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प्रार्थना पत्र धारा–5 मियाद अधिनियम पर योग्य अधिवक्ता अपीलार्थीगण को सुना गया ।
प्रार्थना पत्र में अंकित तथ्यों व कारणों को दृष्टिगत रखते हुए प्रार्थना पत्र स्वीकार किया जाकर अपील प्रस्तुत करने में हुए 06 दिन के विलम्ब को क्षमा किया जाता है ।
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यह सिविल विविध अपील न्यायालय मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण (विशिष्ठ न्यायाधीश आवश्यक वस्तु अधिनियम) जयपुर (जिसे इस निर्णय में आगे 'अधिकरण' संबोधित किया जावेगा) द्वारा पारित निर्णय व पंचाट दिनांक 09.02.2018 के विरूद्ध प्रस्तुत की गई है । इस अपील द्वारा अपीलार्थीगण / दावेदारान, जो कि मृतक पूरणसिंह के वारिसान हैं, ने अधिकरण द्वारा दिलायी गई क्षतिपूर्ति राशि 8,48,400 / – रूपये में वृद्धि करने की प्रार्थना की है ।
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इस अपील पर योग्य अधिवक्ता अपीलार्थीगण को सूना गया ।
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योग्य अधिवक्ता अपीलार्थीगण का एकमात्र तर्क यह है कि 'अधिकरण' ने बिना किसी साक्ष्य के मृतक की आयु 53 वर्ष होना मानकर व इसे आधार मानकर क्षतिपूर्ति राशि की गणना करने में गंभीर व सारवान त्रुटि कारित की है, जबकि पोस्टमार्टम रिपोर्ट (प्रदर्श—7) में मृतक की आयु 45 वर्ष होना अंकित है जिसे गलत माने जाने के कोई आधार व कारण अभिलेख पर नहीं हैं फिर भी 'अधिकरण' ने इस दस्तावेज पर विश्वास न कर गंभीर त्रुटि कारित की है। अन्त में उनका निवेदन है कि उक्त तथ्यों व परिस्थितियों में यह अपील स्वीकार की जाकर मृतक की आयु 45 वर्ष होना मानी जाकर इस आधार पर क्षतिपूर्ति राशि की पुनः गणना की जाकर क्षतिपूर्ति राशि अपीलार्थीगण को दिलाई जावे ।
योग्य अधिवक्ता अपीलार्थीगण के कथनों पर विचार किया गया व आक्षेपित निर्णय व पंचाट का अवलोकन व परिशीलन किया गया ।
- आक्षेपित पंचाट व निर्णय के अवलोकन के बाद यह न्यायालय योग्य अधिवक्ता अपीलार्थी के तर्कों में किसी प्रकार का कोई सार नहीं पाती है। 'अधिकरण' ने मृतक की पत्नी दर्शना बाई के निर्वाचन आयोग कार्ड, जिसमें उसकी आयु दिनांक 01.01.1995 को 31 साल होना अंकित है, के आधार पर दुर्घटना की दिनांक 26.06.2013 को मृतक की पत्नी की आयु 48 वर्ष 6 माह होना निर्णीत करते हुए व तत्पश्चात् मृतक की पत्नी द्वारा स्वयं की साक्ष्य में उसके पति का उससे पांच साल बड़ा होना स्वीकार किये जाने के आधार पर मृतक की आयु मृत्यु के समय 53 साल होना सही निर्णीत किया है। निर्विवादित रूप से मृतक की आयु के संबंध में कोई दस्तावेज या सारवान साक्ष्य अपीलार्थीगण द्वारा प्रस्तुत नहीं की गई थी, अतः इस तथ्य को दृष्टिगत रखते हुए व मृतक की पत्नी की साक्ष्य के प्रकाश में केवल पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर मृतक की आयु 45 वर्ष होना प्रमाणित नहीं माना जा सकता।
उपरोक्त विवेचन से यह अपील सारहीन होने से निरस्त किए जाने योग्य होने से एतद्द्वारा निरस्त की जाती है।
(न्या० प्रकाश गुप्ता)
ऋषिकेश सोनी / 16
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