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Mushtak @ Sameer S/O Fareed Mohammad B/C Musalman vs. State Of Rajasthan

Court:High Court of Rajasthan, Jaipur
Judge:Hon'ble Unknown Judge
Case Status:Pending
Order Date:10 May 2019
CNR:RJHC020272852019

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Order Issued After Hearing

Purpose:

First Hearing

Listed On:

29 Mar 2019

Order Text

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S.B. Criminal Misc. SOS Application No. 396/2019

in

S. B. Criminal Appeal No. 504/2019

Mushtak @ Sameer S/o Fareed Mohammad B/c Musalman, R/o J.k. Nagar Kota Ps Udhyog Nagar Kota Dist. Kota Raj. (At Present Confined At Centtal Jail Kota)

----Appellant

Versus

State Of Rajasthan, Through PP

----Respondent

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योग्य अधिवक्ता प्रार्थी / अभियुक्त की ओर से तर्क प्रस्तुत किया गया कि विद्वान अधीनस्थ न्यायालय द्वारा अभियोक्त्री की आयु के कम में निकाला गया निष्कर्ष पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्य के विपरीत है। उनका कथन रहा कि अभियोक्त्री के पिता पी. डब्ल्यू 4 ने अपनी जिरह में स्वीकार किया कि उसे टोडरी से कोटा में आये 15–16 साल हो गये तथा जब अनिता गुम हुई उसके महिने दो महिने पहले उसका विवाह कर दिया था तथा जब वह कोटा आया था तो उस समय अनिता की आयु लगभग 7 वर्ष थी। उनका कथन रहा कि पी.डब्ल्यू 4 मोहनलाल के उक्त बयानों की रोशनी में अभियोक्त्री वयस्क होना साबित हुई है, जिसका विवाह भी होना बताया गया है तथा अधिक से अधिक यह मामला आपसी सहमति का बनना माना जा सकता है। उनका यह भी कथन रहा कि प्रार्थी/अभियुक्त काफी समय से अभिरक्षा में है। अतः प्रार्थी/अपीलार्थी की ओर से प्रस्तुत यह सजा स्थगन प्रार्थना पत्र स्वीकार किया जावें।

योग्य लोक अभियोजक द्वारा उक्त तर्को का विरोध किया गया तथा हस्तगत सजा स्थगन प्रार्थना पत्र खारिज किए जाने का निवेदन किया गया।

सुना गया एवं विचार किया गया।

मामले के तथ्यों एवं परिस्थितियों को मध्यनजर रखते हुए तथा योग्य अधिवक्ता द्वारा पी.डब्ल्यू. 4 के बयानों की रोशनी में अभियोक्त्री की आयु एवं उसके विवाहिता होने व अधिक से अधिक मामला सहमति का होने के कम में प्रस्तुत तर्को एवं अपील विचारार्थ ग्रहण होने के परिणामस्वरूप अपील की नियमित सुनवाई के क्रम में सूचीबद्ध होने के अन्तराल व अभियुक्त की न्यायिक अभिरक्षा की अवधि को दृष्टिगत रखते हुए, मामले के गुणावगुण पर टिप्पणी किए बिना, यह सजा स्थगन प्रार्थना–पत्र स्वीकार किया जाना न्यायोचित प्रतीत होता है। अतः यह सजा स्थगन प्रार्थना—पत्र स्वीकार किया जाता है और आदेश दिया जाता है कि यदि प्रार्थी / अभियुक्त मुश्ताक उर्फ समीर इस न्यायालय में दिनांक 10.6.2019 को एवं तत्पश्चात जब भी उसे आदेशित किया जावे, अपनी उपस्थिति हेतु, पचास हजार रूपए का बन्ध—पत्र एवं पच्चीस—पच्चीस हजार रूपए की दो प्रतिभूतियां विद्वान विचारण न्यायालय के संतोषप्रद प्रस्तुत करे तो उसे जमानत पर रिहा कर दिया जावे एवं विद्वान विशिष्ठ न्याायाधीश, लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम एवं बाल अधिकार संरक्षण आयोग अधिनियम कम संख्या 1, झालावाड द्वारा सैशन प्रकरण संख्या 137/2018 में पारित आक्षेपित निर्णय दिनांकित 8.3.2019 के तहत दिए गए "दण्डादेश" का क्रियान्वयन इस अपील के निर्णीत होने तक स्थगित रखा जावे।

(महेन्द्र माहेश्वरी) न्यायाधिपति

<u>जे एस पंवार / 10</u>

राजस्थान उच्च न्यायालय, जयपुर पीठ, जयपुर

एकल पीठ दाण्डिक अपील संख्या : 504 / 2019

10.5.2019

<u>माननीय न्यायाधिपति श्री महेन्द्र माहेश्वरी</u>

अपीलार्थी के अधिवक्ता श्री अब्दुल कलाम खान लोक अभियोजक श्री अतुल शर्मा।

सुना गया।

अधीनस्थ न्यायालय के निर्णय के विरूद्ध प्रस्तुत अपील में उठाये गये कानूनी मुद्दों को ध्यान में रखते हुए अपील सुनवाई हेतु विचारार्थ ग्रहण की जाती है।

( महेन्द्र माहेश्वरी ) न्यायाधिपति

जे एस पंवार⁄10

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Order(2) - 10 May 2019

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Order(1) - 29 Mar 2019

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