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Manorama Agrawal vs. Aman Agrawal

Court:District and Sessions Court, Ashoknagar, Madhya Pradesh
Judge:Hon'ble Ii District And Additional Sessions Judge
Case Status:Pending
Order Date:23 Nov 2023
CNR:MP67010021452020

AI Summary

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Order Issued After Hearing

Purpose:

Matter Relating To Hearing Of Interim Application

Before:

Hon'ble I District And Additional Sessions Judge

Listed On:

23 Nov 2023

Order Text

वादिया द्वारा श्री जे.एन. राजौरिया अधिवक्ता उपस्थित।

प्रतिवादी क्रमांक 1 द्वारा श्री दिनेश सिंह चौहान अधिवक्ता उपस्थित।

प्रतिवादी क्रमांक 2 द्वारा श्री एल.एन. लोधी अधिवक्ता उपस्थित।

प्रतिवादी कमांक 3 द्वारा श्री सी.एस. साहू अधिवक्ता उपस्थित।

प्रतिवादी कमांक 4 द्वारा श्रीमती अमिता खेर अधिवक्ता उपस्थित।

प्रतिवादी कमांक 5 की ओर से कोई उपस्थित नहीं। प्रकरण समझौता आवेदन पत्र पर आदेश हेतू नियत है।

प्रकरण के अवलोकन से प्रकट होता है कि वादिनी श्रीमती मनोरमा अग्रवाल ने वाद पत्र में उल्लेखित संपत्तियों का बंटवारा किये जाने हेतू प्रतिवादीगण के विरूद्ध यह वाद प्रस्तुत किया है। वाद पत्र में कुछ संपत्ति छूट जाने के कारण उसकी जानकारी प्रतिवादी कमांक 1 के द्वारा जबाव आवेदन प्रस्तत कर दी गयी।

वादिया एवं प्रतिवादी कमांक 1 लगायत 4 की ओर से जो समझौता आवेदन पत्र प्रस्तुत किया गया है, उसमें सभी संपत्तियों का उल्लेख किया गया है एवं उभयपक्ष ने समझौता आवेदन पत्र में उल्लेखित संपत्तियों के संबंध में ही बंटवारा चाहा है।

वादिया स्वर्गीय ओमप्रकाश अग्रवाल की पत्नी है. जबकि प्रतिवादी कमांक 1 अमन अग्रवाल, प्रतिवादी कमांक 2 डा. अमित अग्रवाल एवं प्रतिवादी कमांक 3 अनुज अग्रवाल स्वर्गीय ओमप्रकाश अग्रवाल के पुत्र है, जबकि प्रतिवादी क्रमांक 4 श्रीमती मितुल मित्तल स्वर्गीय ओमप्रकाश अग्रवाल की पुत्री है।

वादिया ने यह अभिवचन किया है कि समस्त वादग्रस्त संपत्ति संयुक्त हिन्दू परिवार की पैत्रिक संपत्ति हैं। वादिया एवं प्रतिवादी कमांक 1 लगायत 4 के अतिरिक्त मृतक स्वर्गीय ओमप्रकाश अग्रवाल के और कोई भी विधिक

वारिसान नहीं है। अतः ऐसी परिस्थिति में वादिया एवं प्रतिवादी क्रमांक 1 लगायत 4 हिन्दू उत्तराधिकार अधिनियम के तहत वर्ग-एक के वारिस हैं। वर्ग-एक के वारिस होने के कारण स्वर्गीय ओमप्रकाश अग्रवाल के विधिक वारिसान वादग्रस्त संपत्ति में बराबर—बराबर हिस्सा पाप्त करेंगे।

समझौता आवेदन पत्र के समर्थन में वादिया एवं प्रतिवादी क्रमांक 1 लगायत 4 के राजीनामा कथन लिये गये। उक्त राजीनामा कथन में वादिया एवं प्रतिवादी कमांक 1 लगायत 4 ने वादग्रस्त संपत्ति के संबंध में समझौता होना व्यक्त किया। उक्त समझौता उन्होंने स्वेच्छया से भी करना व्यक्त किया है। उभयपक्ष इस बिन्द पर सहमत हुये हैं कि वादग्रस्त संपत्ति में वादिया एवं प्रतिवादी कमांक 1 लगायत 4 का बराबर-बराबर हिस्सा है ।

समझौता आवेदन पत्र पर वादिया सहित प्रतिवादी कमांक 1 लगायत 4 ने अपने-अपने हस्ताक्षर किये हैं। सभी पक्षकारों की पहचान उनके अधिवक्ताओं के द्वारा की गयी है। राजीनामा कथन में सभी ने वादग्रस्त संपत्ति में $1/5 - 1/5$ भाग का बंटवारा किये जाने पर सहमति व्यक्त की है।

वादग्रस्त संपत्ति संयुक्त हिन्दू परिवार की संपत्ति है। उक्त संपत्ति में बंटवारा किये जाने हेतु उक्त संपत्ति के विधिक वारिसान सहमत हुये हैं। इसलिये किया गया समझौता विधि अनुसार है। अतः समझौता आवेदन पत्र स्वीकार किया जाकर निम्न आशय की प्रारंभिक आज्ञप्ति पारित की जाती है:—

(1). वादग्रस्त संपत्ति जिसका उल्लेख समझौता आवेदन पत्र में किया गया है. उक्त वादग्रस्त संपत्ति में वादिया 1/5 भाग प्राप्त करने की अधिकारी है।

(2). प्रतिवादी कमांक 1 अमन अग्रवाल, प्रतिवादी कमांक 2 डा. अमित अग्रवाल, प्रतिवादी कमांक 3 अनुज अग्रवाल एवं प्रतिवादी कमांक 4 श्रीमती मितूल मित्तल भी वादग्रस्त संपत्ति, जिसका उल्लेख समझौता आवेदन पत्र में किया गया है, में 1/5—1/5 भाग प्राप्त करने के अधिकारी हैं।

(3). वादिया एवं प्रतिवादीगण के द्वारा हस्ताक्षर किये गये समझौता आवेदन पत्र की प्रति, जिसमें वादग्रस्त संपत्तियों का उल्लेख है, इस आज्ञप्ति का भाग रहेगा।

(4). उभयपक्ष अपना-अपना वाद व्यय वहन करेंगे।

उपरोक्तानुसार डिकी बनायी जावे।

डिक्री की एक प्रति समझौता आवेदन पत्र की सत्यापित प्रति के साथ कलेक्टर, अशोकनगर को इस निर्देश के साथ भेजी जावे कि वादग्रस्त संपत्ति का विधिवत बंटवारा किया जाकर न्यायालय के समक्ष अपना प्रतिवेदन प्रस्तुत करें।

कलेक्टर, अशोकनगर से बंटवारा संबंधी प्रतिवेदन प्रस्तुत होने पर अंतिम डिक्री बनायी जावेगी, तब तक के लिये इस प्रकरण को अभिलेखागार में सुरक्षित रखा जाना न्यायोचित प्रतीत होता है।

अतः कलेक्टर, अशोकनगर से प्रतिवेदन प्राप्त होने तक प्रकरण को अभिलेखागार में सुरक्षित रखे जाने हेतु भेजा जावे।

(प्रवेन्द्र कुमार सिंह) प्रथम जिला न्यायाधीश. अशोकनगर (म.प्र.)

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